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Thursday, 28 July 2011


अजब शहर

अजब शहर है मेरा चलते पत्थरों का
दिल है, दर्द है, मगर प्यार नहीं है

चलते हैं साथ साथ बनकर हमसफ़र
हाथों में हाथ है पर एतबार नहीं है

हर एक है तैयार ताने हुए पत्थर
भीड़ में क्या कोई गुनाहगार नहीं है


कौन सुनता है दिल की सदा कहिये
व्यापार है वादों का , पर प्यार नहीं है

हम छोड़ भी दें शहर, न होगा विराना
इसे "कादर" इंसान की दरकार नहीं है



केदारनाथ "कादर"
 






धन्यवाद

जानते हो दुःख ....
क्यूँ चाहता हूँ तुम्हें ?

तुम ही हो मुझसे

ठुकराए हुए, लाँछित
अवांछित, आवारा
या...सच्चे मित्र

कब त्यागते हो तुम ?
पूरी तरह किसी को
लौट ही आते हो तुम
आती साँस की तरह

अब तो मैं तम्हें -
प्रिय भी कहने लगा हूँ
तुम्हारी आमद से ही
कुछ इंसान हुआ हूँ

हाँ, इसके लिए आज मैं
तुम्हें धन्यवाद देता हूँ
मेरे इस मन में घर
अपना बनाने के लिए


केदारनाथ "कादर"




ओ ! कामिनी, मधुवर्षिणी

तू मधु बरसाती चल
तू यौवन छलकाती चल



मुग्ध करती चल नयन को
चूम ले उड़कर गगन को
तू झंकृत करती स्वरों को
चपल पायल बजती चल

ओ ! कामिनी, मधुवर्षिणी
तू मधु बरसाती चल
तू यौवन छलकाती चल


कर विकल पलपल चपल
तू चित को चुराती चल
धर दामिनी सी छवि चंचल
मेरा मन लुभाती चल

ओ ! कामिनी, मधुवर्षिणी
तू मधु बरसाती चल
तू यौवन छलकाती चल

केदार नाथ "कादर"

मौत

मौत






वो दौड़ा किया बदहवास


बचने को यहाँ- वहाँ


मौत महबूब दिखी उसको


वो गया जहाँ-वहाँ


नाहक वो परेशान हुआ

वह भटका कहाँ -कहाँ


डरता रहा "कादर" मौत से


वो जिन्दा रहा कहाँ



Kedarnath”kadar”


                                                    बुद्ध


मैं लड़ता हूँ एक युद्ध


जो है मेरे ही विरुद्ध


मैंने ही किये हैं अनचाहे


                               द्वार विचार सब रुद्ध






मन है बड़ा मचलता


मुझसे है बहुत क्रुद्ध


संयम की राह से ही


हम होंगे "कादर" बुद्ध

kedarnath"kadar"

Saturday, 25 June 2011




औरों के लिए
मैंने हर लफ्ज़ लिखा जिसके लिए
वो मचलता रहा ताउम्र औरों के लिए

मैं समझता रहा छाई घटा मेरे लिए
खिला वो गुल था सिर्फ भौरों के लिए

मेरा बज़ूद ख़ाक हुआ जिसके लिए
वो रहा पढता कसीदे गैरों के लिए

मेरे मरने के बाद मेरी कब्र पे लिखना
"कादर" जिया ये जिंदगी औरों के लिए


kedar nath “kadar”




मैं दर्द से प्यार करता हूँ


क्यूँ पूछते हो किस से प्यार करता हूँ
जिसे न चाहे कोई उससे प्यार करता हूँ

अजीब शख्स हूँ, जानता ये मैं भी हूँ
यही बजह है बे-ग़रज प्यार करता हूँ

मैं आह-ओ- शर्द से प्यार करता हूँ
मैं राह की गर्द से प्यार करता हूँ

डर है हैवान बन न जाऊँ "कादर"
इसलिए मैं दर्द से प्यार करता हूँ

Kedarnath “kadar”